Saturday, August 6, 2016

क्या लिखूँ मै गीत




क्या लिखूँ मै गीत ये तू ही मुझको दे बता
नारी का धीर लिखूँ असुवन का नीर लिखूँ
लज्जा मे सिमटी हुयी बहनो का चीर लिखूँ
भूख से बिलखते हुये मासूम अधीर लिखूँ
या फिर देश के लिए मर मिटे वो वीर लिखूँ
क्या लिखूँ मै गीत क्या लिखूँ  मै  गीत
नयी व्यवस्थाओं के नए नए से रीत लिखूँ
न्याय पर अन्याय की कैसी मै जीत लिखूँ
काल चक्र को वक्त के विपरीत लिखूँ
सत्य को होते यहाँ  कैसे भयभीत लिखूँ
क्या  लिखूँ मै गीत क्या लिखूँ मै गीत
शब्द के प्रवाह पर ऐसा शूरवीर लिखूँ
सोच को बदले ऐसा मीर या पीर लिखूँ
मुस्कुराता हुआ आज मै कश्मीर लिखूँ
स्वच्छ और साफ मै भारत की तस्वीर लिखूँ
क्या लिखूँ मै गीत क्या लिखूँ  मै  गीत ------- सुजाता शुक्ला

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