भाव मंथन
Wednesday, August 10, 2016
आशा
बडी तल्ख है आज ज़िन्दगी
खुशियो के पैमाने चुन
सोच बडी कर अपनी तु
मन ही मन सपनो
को बुन
देख देहरी बैठी है
एक आशा नन्ही सी
ठान ले कुछ कर संकल्प
पुरी करने की करले धुन
सुजाता शुक्ला
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