Saturday, August 6, 2016

मनन



                 मनन 
गौरवर्ण बन इतराती है धुप गुनगुनी भोर की
चहचहाहट हल्लागुल्ला शामत आती चोर की
 मुक्का लात और घुंसा आदत ये कठोर की
थक हार कर चुप रहना निशानी है कमज़ोर की
दियाबाती तुलसी चौरा मंज़िल है उस डोर की
भर दे सबकी झोली, क्या बात उस चितचोर की
आल्हादित हो झुम रहा खासियत ये मोर की
प्यासा बैठा स्वाति जल बिन है कहानी चकोर की
झुमे डाली वन उपवन सारे, छटा देख घटोप की
पवन संग धरती झुमी मस्ती घटा घनघोर की.
                      ..... सुजाता शुक्ला

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