टूट जाते है रिश्ते अक्सर
कांच की तरह
गर्माहट बनाये रखिये आंच की
तरह
नाजुक सी डोर है सम्बन्धो
की साथी
सम्हालिए एक अलग अन्दाज की
तरह
किसे कहे अपना, कौन है यहाँ पराया
रंग बदल जाते है उसके मिज़ाज़ की तरह
सादगी पसन्द है हमे सच्चाई के
वास्ते
दिल मे घर कर गया वो दिलराज की
तरह
बडी ही मासुमियत से मुझे बना गया
सुजाता शुक्ला
ले गया सुख चैन दगाबाज़ की तरह
ठोकर खा के परखते है सब यहा
दर्द भी सहेजा है हमने नाज़ की तरह
सुजाता शुक्ला
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