भाव मंथन
Thursday, August 11, 2016
उम्मीद
न उम्मीद छोड न मुख को मोड
राह
से अपना रिश्ता
जोड
न थक के हार चुनौती स्वीकार
न मिलेगा ये जीवन बार बार
सुजाता शुक्ला
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