अबके सावन खुब बरसेगी बदरिया
हल्कु चाचा के खेत मे
,जुम्मन काका की बाडी मे
और बडकी भौजी के अंगना मे
खुब भीगे है पथराये सुखे से
धान , बाडी के झाड़ और बुढा पीपल
शायद इस बरस मुस्कुरायेंगे
कुछ चेहरे ,पहनेगी मुनिया नये कपडे
और छानी से टपकते पानी की
होगी मरम्मत
पिछले बरस भी इसी आस मे ,आसमान
तक रही थी कई जोडी आंखे
हरिया को भुख ने मारा तो
मन्नु को कर्ज़ ने
और गज्जु तो दर्द की सीमा
पार कर गया
रोते बिलखते बच्चो को छोड,
जाने किस पेड मे लटक गया
सोचा मेरे बाद सब ठीक होगा
,मगर बुढी माँ को लकवा मारा
तिजन की पढाई छुटी और फुलवा
के हाथ पीले हो गये
बीस बरस बडे लख्खन के साथ
सारा कर्ज उतर गया
बैठे बैठे सोच रही है बडकी
भौजी
अबके सावन खुब बरसेगी
बदरिया
तिजन का विहाव करेगी किसी
हम उम्र से
बडे ही धूमधाम से
अबके सावन खुब बरसेगी
बदरिया ……. सुजाता शुक्ला
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