तुम्हारी गाडी भी कीचड मे
खराब हो जाती है
कभी हमारी बस्ती मे भी चल
के देखो तो साहब
तुम्हारे लिये हमेशा पैसा
कम ही होता है
कभी हमारे दो रोटी का जुगाड देखो तो साहब
तुम्हे गुस्सा कहते है बडी
जल्दी आता है
कभी हमारा भी धीरज तो परखो साहब
तुम्हे टी वी की आवाज ही
सुनाई पडती है
कभी भुख से बिलखते बच्चो को
सुनो तो साहब
कहते है तुम्हे मनोरंजन हर
दिन चहिये
कभी अपना एक पल हमे भी तो
देकर देखो साहब -------- सुजाता शुक्ला
No comments:
Post a Comment