Tuesday, August 9, 2016

सोचो साहब



तुम्हारी गाडी भी कीचड मे खराब हो जाती है
कभी हमारी बस्ती मे भी चल के देखो तो साहब
तुम्हारे लिये हमेशा पैसा कम ही होता है
कभी हमारे  दो रोटी का जुगाड देखो तो साहब
तुम्हे गुस्सा कहते है बडी जल्दी आता है
कभी हमारा भी धीरज तो  परखो साहब
तुम्हे टी वी की आवाज ही सुनाई पडती है
कभी भुख से बिलखते बच्चो को सुनो तो साहब
कहते है तुम्हे मनोरंजन हर दिन चहिये
कभी अपना एक पल हमे भी तो देकर देखो साहब --------  सुजाता शुक्ला

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