माँ तुमसे जीवन को मेरे निश्छल निर्मल सा प्यार मिला
तुमसे मेरे रूप प्रतिरूप को एक नया श्र्रूंगार मिला
आशा से परिपूरित मन मे तुम्हारी अनुपम छवि है
माँ पर कौन लिख सका बेटा बेटी या कवि है
मेरी एक एक श्वास पर हर अहसास तुम्हारा है
सुरभित चन्दन सी अनुभूति पावन सौगात तुम्हारा है
व्याकुल मन के नीरस पतझड़ पर बसंत बहार तुम हो
बिखरते रिश्तो के बीच कड़ी का एक वरदान तुम हो
जाने कैसे व्यथा मे भी मुस्कुरा लेती हो तुम
संताप छुपा के आँचल मे गम सहती चुप रहती हो तुम
सीखा है तुमसे हमने विपदाओं मे भी हँसना
तपते संघर्षमय जीवन मे शीतल बूंदों सा बरसना
कितना कुछ है तुममे जो आत्मसात करना है
तुम्हारे आदर्शो को ग्रहण कर इस जीवन से तरना है
सुजाता शुक्ला

