Monday, August 15, 2016



मन्दिर हो की मस्जिद हो, गिरिजा हो की गुरुद्वारा
मुझे है प्यार वतन से , सभी कुछ है मुझे प्यारा
रखना दूर मुझको तुम , इन जात पात की दिवारो से
देश के लिये स्वीकार है ,  सदैव चलना अंगारो से
बनी हूँ  इस मिट्टी से ,इसी मे मिल जाउंगी एक दिन
चाह यही रखती हूँ  हरपल यही हो जन्म मेरा दुबारा
                                     सुजाता 

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