Saturday, August 6, 2016

इन्तजार

                
आभास है तुम्हारे कदमो की , तुम आओगे जरुर
तुम्हारी गैरमौजुदगी मे तुमको जी लेती हु
कभी कभी भुले बिसरे खतो को पढ लेती हु
कमरे उस कोने मे तुम्हारी बनाई तस्वीर है
दिवाल पर अब भी लटका है तुम्हारा टेनिस
और तुम्हारे जुते बिस्तर के निचे जस के तस है
फिर से बाहर की बोगनविलिया खुब खिली है
आज मौसम मे फिर से खुब नमी है
आज तुम्हारे पसन्द की घर मे खीर बनी है
आज फिर तुम्हारे बचपन की तस्वीर मिली है
आज फिर तुम्हारी बातो का सिलसिला याद आया है
आज फिर तुम्हारी याद ने मुझे खुब रुलाया है
मुझे मालुम है बेटा , वक्त अब बदल गया है
जिन्दगी तो सुख और दुख का रेला है
हम सब की जिंन्दगी मे खुब झमेला है
मगर एक आस है दिल के भीतर किसी कोने मे
आभास है तुम्हारे कदमो की , तुम आओगे जरुर............... सुजाता

2 comments:

  1. बहुत सुन्दर और भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

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